तेरी खुद तेरा ख्याल दिल में 2
"तेरी खुद तेरा ख्याल"
क्या कहें दिल की व्यथा तुम से,
हाल कुछ ऐसा हुआ पड़ा है।
रात को बिन तेरे सोने का जी नही होता,
सुबह का मौसम जगने की इजाजत नही देता...
Pari
पल पल हर पल यही सिलसिला चलता है,
मैं कुछ कहता हूं और होठों से आपके ना निकलता है।
ये आदत है आपकी या कोई और सिलसिला है,
कुछ तो है जो खुली आंख से भी मुझे नहीं दिखता है।।
Pari
मासूमियत मेरे शब्दों में कल भी थी और आज भी है,
नजरिया आपका बदला है शब्द आज भी मेरे वही हैं।
Pari
बेशक बदल गए हैं ये रास्ते अब हमारे,
लेकिन मंजिल तो आज भी वही मोहब्बत ही है।
Pari
जरा ख्याल छोड़ो खुद का और मुस्कुरा भी दिया करो,
क्यों ख्याल नही तुम्हे उनका जो तुम्हे देख मुस्कुराते है।
pari
यूँ न रूठो हमसे तुम अब इन लबो को खोलो जी,
हम है इंतज़ार में कब से तनहा कुछ तो बोलो जी।।
Par
© ® Pari....
Love is life......Love is god....Love is everything...
उपरोक्त पंक्तियों में शायर ने बड़ी ही शालीनता से पहली शायरी में अपने आलसी होने को बयां किया है
ReplyDeleteऔर अगली शायरी तक शायर के अंदर द्वेष भावना का आगमन प्रतीत होता है जो कि उसको शकी भी दर्शाता है😀
और अगली कुछ पंक्तियों में शायर ने अपने क्रोध को थोड़ा और वेग देते हुए जब कुछ नहीं बदलता देख अंतिम पंक्ति में अपने दिल की पीड़ा को अपने साथी को दर्शाने की कोशिश की है, एक प्रकार से पूरा माहौल जैसे रूठने मनाने के सिलसिले में लिप्त हो जो कि किसी भी रिश्ते का अभिन्न अंग हैं।
बहुत खूब पारी😂😂💕
बस ऐसा ही कुछ है, दिल के अंदर ऐसे ही भाव आते है दोस्त, कुछ भुला देते हैं और हम लिख लेते है..
Deleteधन्यबाद भाई
Nice..
ReplyDeleteधन्यबाद जी
Delete