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जुनून सीखने का

मैं अक्सर बाहर निकलता हूँ तो कुछ न कुछ तो सीखने को जरूर मिलता है, लेकिन वो सीखने को क्यों मिलता है?? क्यूंकि मैं कुछ सीखना चाहता हूँ तभी वो मुझे दिखाई देता है..और ये सब कर सकते हैं, बस जरूरी है तो चाहत और जूनून सीखने का..... अब बात करते है वक्त की, अक्सर हम नौकरी, घर परिवार के साथ व्यस्त होने के कारण कहते हैं वक्त नही है...आज मैं एक महिला से मिला जो जॉब करती है, उसका 6 महीने का बेबी संभालती है और साथ मे उसे डांस का जुनून है तो साथ मे डांस भी करती है, और tv शो में भी डांस में सेलेक्ट हो गयी..कैसे??  जुनून कुछ करने का, साथ मे अपनी सारी जिम्मेदारी निभाने के साथ..... तो मुझे आज ये सीखने को मिला की वक़्त नही यार ये सिर्फ बहाना है, कुछ करने की चाहत और जुनून हो तो वक्त भी निकल आता है और बाकी सारे काम भी समय के साथ हो जाते है... तो फिर रोजमर्रा के जीवन के साथ कुछ ऐसा सीखे जो आपकी अपनी अलग पहचान हो, अपना हुनर पहचाने और कुछ अलग करें।। Pari © ® Pari.... Love is life......Love is god....Love is everything...

तेरी खुद तेरी याद

मेरी आस भी तू मेरी सांस भी तू, मेरा जिकुडा की तीस करार भी तू। आन्दू तेरु ख्याल सुवा सुद बुद मेरी ख्वे जान्द, उड़ी की मन मेरु सुवा, दौड़ी दौड़ी की त्वे मा आन्द। न क्वी आस न क्वी तीस बाकी अब रईंच, त्वे दगड़ रैणकी सुवा मन आस एक बचींच।।। मेरी आस भी तू..... झणी कुजणी क्या बात ह्वे, मेरी सुवा तू दूर छै ज्यू प्राण खुदे सुवा, कैकु हमन क्या जी ख्वे। किस्मत की बात होली, कि बिधाता रुशै होलु हमसे, बांद मेरी दूर गौं मा, मी परदेशा मा दूर त्वेसे। मेरी आस भी तू... नौना नौनी पूछदा होला, बुबा हमरू हमसे दूर किलै, क्या प्यार प्रेम नि च हमसे, जो दगड़ हमथै नि अपड़ा बुलै। किलै बाबा हमरू हमसे रूठी, जो देश हमथे छोड़ी चली गैनी, क्या ज़िन्दगी च बोला, नौना-नौनी सुवा सभी देखा बिछड़ी गैनी।। मेरी आस भी तू मेरी सांस भी तू, मेरा जिकुडा की तीस करार भी तू। Pari © ® Pari.... Love is life.....Love is god....Love is everything..

तेरी बात निराली

कन सुपन्या हूंदा कन आन्दू कैकु ख्याल, ज्यू तरसदु कैका बिगर कन आन्दू कै देखी मौल्यार। हूंदी होली आस कैकी, फिकर करदु रैन्दु क्वी औरि, सेली पोडदी जिकुड़ा मा देखकी मुखड़ी तेरी।। सुपन्या भी तेरा अर अब आस भी तेरी, प्रेम का ये संसार मा गैल्या याद भी तेरी। ऑंखयु की तीस अर जिकुड़ा म कीस सी, माया तेरी बांद जन कंडली कु झीस सी।। हाथ लगान्दु त चस चुभी जान्द, दूर भी त्वे बिगर हे लठ्याली नि रयान्द। कांडो का बीच मा हिंसरै की गुंदकी छै, तांबा की गागर मा जन पन्देरा कु पाणी छै। बैसाख मैना जन काफल की डाली सी, तिबरी मा बैठी मेरी आस उज्याली सी हे बांद मेरी तू मन की छै प्यारी, याद औन्दन तेरी छुवीं वो न्यारी। तू ही मेरी अखोडकी डाली छै, प्रेम उलास मेरी फूलूँ की क्यारी छै।। Pari © ® Pari.... Love is life.....Love is god....Love is everything..

वो बात अलग थी

वादे निभाने होते हैं मोहब्बत में, सिर्फ आसरे नही रहा जाता, सहने होते हैं दर्द अनेक इश्क़ में, हर कोई यूहीं किनारे नही आता। वो सहर याद है मुझे आज भी, वो तेरा किनारे वाला मकान याद है, वो मासूमियत से तेरे वादे याद हैं, वो थोड़ी सी खुलती तेरी खिड़की याद है। आज भी नही भूला हूँ समझो ना, तूने कही थी जो बात सिर्फ बातों में, मुस्कुराती है तू आज भी सुबह संग, गीले होते है तकिये मेरे रातो में।। वो लम्हे अलग थे वो दिन अलग थे, सबसे अनोखे अपने इशारे अलग थे, वो तेरा छत पर मुस्कुराना और मेरा साईकिल से निकल आना अलग था। दूर गलियों में सैर पे निकलना संग हसीन लम्हे गुजारना अलग था, यादों का सिलसिला अब बचा है, संग वक्त गुजारना हमारा अलग था।। न कभी तोड़ी तुमने थी चुप्पी, न कभी साथ मेरा था छोड़ा, फिर न जाने जीवन के उस मोड़ पर, तुमने क्यों हाथ मेरा छोड़ा। जब कर दिया था खुद को नाम मेरे, फिर क्यों अधर में मुँह तुमने मोड़ा, क्या वो वादे करार सब झूठ थे, जो नाजुक मेरा दिल तुमने तोड़ा।। कुछ सवाल आज भी बाकी है, कुछ जवाब आज भी अधूरे हैं, मेरे वादे सारे सच थे तब भी, मेरे करार सारे पक्के है आज भी। न मैं बदला ...

सुवा त्वे बगैर

दूर यख परदेश मा, ज्यू खुदेन्दु सुवा त्वे बगैर, यखुली ये दूर देश मा, आँसू नि रुकदा सुवा त्वे बगैर। क्या करूं क्या बोलू समझ नि औन्दु अब मेरी सुवा, खुदेन्द जिकुड़ी तरसदु प्राण अब नि रयेन्दू मेरी सुवा। द्वी चार पैसा का खातिर, कन बिछढ़ो हुयूँ हमरू, न त च हैंसी न क्वी करार, बस यादों मा जीणु हमरु। ख्याल औंदी बन बनी मि भी दिन आला कुजणी कब, डेरा मा दगडी तेरा ऑंखयु समणी छविं लगोला झणी कब दूर यख... याद भी आली त आँसू लुकाण, तेरी खुद जिकुड़ी मा छुपाण, मन मारी की भी दूर च रैण जख तख बस त्वे खुज्याण। रात्यु की नींद हरची, हरची दिन मा कु चैन, भूख नि तीस नि तेरा बगैर, बस ज्यू रैन्दु बेचैन।। दूर यख...

शसक्त महिला, सुदृढ़ राष्ट्र

थोड़ा भोली है थोड़ा मासूम है, लेकिन कमजोर नही है, कष्टो को है सहती हँसकर, लेकिन ये मजबूर नही है। अलग अलग किरदार निभाती, जिसका कोई मोल नही है, जीवन का है अभिन्न अंग, महिला तेरा कोई तोल नही हैं।। हर पहलू में तुम हो समायी, हर लम्हा तुम बिन अधूरा है, कितना भी सपन्न हो कोई, बिन तुम्हारे नहीं कोई पूरा है। क्या कोई तुलना है तुझसे, बिन तेरे नही किसी का वजूद है, तुम हो सम्पन्न सुदृढ़ नारी, जहां में सदैव हो सर्वोपरी। Pari

तेरी स्वाणी मुखड़ी, दिखे आज

आज ही के दिन हम अजनबी थे एक दिन क्या तुम्हें याद है एक दूसरे की झलक को कितने तलब थे क्या तुम्हें याद है। तुम मेरे लिए सोच रही होगी, मै तेरी कल्पना में डूबा था, ज़िन्दगी में आने को एक नया लम्हा जैसे कितने करीब था। कुछ उलझन थी मन मे कुछ उत्सुक थे हम, हर एक चेहरे में तेरा चेहरा तलाशते थे हम। इन होली उन होली दिल में तेरी तस्वीर थे बनाते, क्या तुझे भी भाऊंगा एक सवाल खुद से थे करते। मुलमुल सी मुस्कान होठों पे थी आती, मुझसे मिलने की चाह तू भी भला किसे बताती। फिर आ ही गया वो लम्हा भी धीरे धीरे, रुक रुक में आये हम तुम्हे मिलने पास तेरे। सबसे मिलना मुस्कुरा कर और लेते सबकी खबर, आंखे तो बस तलाश रही थी तुझे, पाने को बस एक झलक। कुछ हलचल थी मन में कुछ सवाल थे खुद से, तू भी तो घबराई होगी जैसे मुराद होगी आज पूरी कब से।। ...... Pari .......