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मेरी चाह पहाड़ी चले पहाड़ की राह

चलो यारो बहुत भटक लिए, बहुत देख लिया शहर की चकचौन्ध, खोलो आंखे सुनो दिल की, आओ चलो फिर से अपड़ा पहाड़ की ओर। Pari ऐ जाओ बौडी की च धै लगाणी या पहाड़ की माटी हे दिदो तुम खुणी, किलै छा भटकणा खैरी मा अभी भौत च मि मा प्यार-उलार त्वे खुणी। Pari किलै खा रहे हो केमिकल यख, किलै फेफड़ों मा धुआँ भोर रहे हो, छैंच जब इतनी सम्पदा घर मा, किलै तब दूसरों मा काम मांग रहे हो। नॉट कमाणा खुणी इतनी सिद्दत से अपड़ी सेहत दाव पर लगा रहे हो, फिर अंग्रेजी दवा दारू का खातिर वी नॉट अस्पतालों में लुटा रहे हो। क्या सोचणा तुम की खै की खैरी यन भविष्य उज्जल होलु तुमरा नौनकु, पर असल मा स्वस्थ हवा पाणी बिना बिष जीवन का घोलणा छ तुम। अभी भी चेती जाओ अभी बिन्डया देर नि ह्वे मेरा भैजी भुलो, जागा अर उठाओ खुटा फिर देवभूमि पहाड़ की तरफ जाणकु।। Pari

एक मैं और एक तू

ज़िन्दगी हसीन है और इसका हर एक पल खूबसूरत होता है, लाखों चेहरे साथ हैं फिर भी सिर्फ एक ही भाता है। रहती है पलपल हजारो तकलीफे और मुश्किले, फिर भी यारो के साथ ये चेहरा हमेशा मुस्कुराता।। Pari हसींन अदायें और लहराती जुल्फे, चेहरे की मुस्कान और सुर्ख आँखे, तारीफ करू क्या और तुम्हारी, बस इतना समझो, जान हो हमारी।। Pari तेरी ये रुठ जाने की अदा बहुत ही खराब है, बदल जाता है सारा ही मिजाज जैसे कोई शराब है। Pari मौसम की करवट और तेरा मिजाज दोनों एक से हो गए हैं, पता ही नही चल रहा कब बदल जाते हैं ये दोनो... Pari पल पल हर पल यही सिलसिला चलता है, मैं कुछ कहता हूं और होठों से आपके ना निकलता है। ये आदत है आपकी या कोई और सिलसिला है, कुछ तो है जो खुली आंख से भी मुझे नहीं दिखता है।। Pari बहुत अकेला हूँ मैं तुम बिन समझा करो, मत छोडो अकेला मेरे साथ तुम रहा करो। जीवन की डोर तुमसे ही है कैसे तुम्हे बताऊँ, हमेशा रहना संग मेरे या फिर जीने को न कहा करो।। Pari... मोहब्बत है तुमसे बेहिसाब इतना समझ लो, यूँही नही है दर्द दिल में तुझ से दूर रहने में। कुछ तो कसूर होगा तेरी मोहब्बत का भ...

किस्सा सच्चाई का

Jan 17, 2018 सालों साल की अच्छाई लग जाती है, तब जाकर कोई कृपा या फिर चमत्कार होता है, ऐसा ही कुछ हुआ था उस रोज भी... बात तब की है जब लड़कियों का होना अच्छा माना जाता था, लेकिन खानदान के लिए वारिश भी तो जरूरी होता है, 5 बेटियां हो गयी सब खुश ही थे लेकिन नरेन्द्र को अपने वारिश की फिक्र होना लाजमी था...कभी किसी का बुरा नही किया...कभी किसी को बुरा नही कहा होगा...जब भी किसी ने मदद के लिए पुकारा तो कभी हाथ पीछे नही किया, ऐसी प्रतिभा भी इनकी...लेकिन दिनों दिन एक दिल मे टीस थी कि क्या मैने कोई पाप किया कभी, क्या मैने अनजाने में किसी को दुख दिया होगा....और ऐसे ही दिनों दिन सवाल खुद से करते नरेन्द्र...लेकिन ऐसा कोई वाकिया याद नही आया....लेकिन जो दिल मे चुभता था वो थी एक लड़के की ख्वाइश..... क्रमश:..... Jan 18, 2018 जैसा की वक्त के साथ सभी को अपनो की चाहत होती है और हर कोई यही चाहता है कि उसके साथ कोई मजबूत कंधा हो इसी ख्वाइश को लिए नरेन्द्र भी बेटे की चाहत किये जा रहे थे.... समय किसी के लिये रुकता नही है अपनी गति से आगे बढ़ता है, और नरेन्द्र की बेटियाँ उम्र की सीढ़ियां चढ़ने लगी और उनक...

दिल ही दिल से

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