एक दोस्त बड़ी निराली है...!

थोड़ी नटखट थोड़ी भोली भाली सी,

एक दोस्त है मेरी बड़ी निराली सी।

अक्सर वो मुझसे मिलती है

मन की अपने सब कहती है

थोड़ा है गुस्सैल भले, लेकिन मुस्कान भी उसकी प्यारी है।

एक दोस्त मेरी बड़ी निराली है।


अभी मिला हूं उससे, बस कुछ दिन का है साथ हमारा,

फिर भी ऐसे मिलती है जैसे सालों का हो कोई नाता प्यारा।

व्यवहार उसका बड़ा सादा है, जैसे है वैसे दिखती है,

मस्त मौला है उसका मन, खुलकर वो जीवन जीती है

एक दोस्त मेरी बड़ी निराली है।


कभी सताती, कभी बताती, कभी वो गुमसुम सी हो जाती।

फिक्र है करती न जाने किसकी, लेकिन चेहरे को शांत है रखती।

इधर उधर की नहीं है करती, लेकिन खबर वो सबकी है रखती,

स्वाद है उसकी बातों में, करती बातें वो मतवाली है,

एक दोस्त मेरी बड़ी निराली है।


एहसास है उसको जिम्मेदारी का, रिश्तो में रखती है तालमेल,

किससे कैसे रहना है, कौन है कैसा, जानती दुनिया के है सारे खेल।

अंदर बाहर का समन्वय, रखती सब जग से है पूरा मेल,

गोरे रंग का उसे भ्रम नहीं, स्वयं रंग में थोड़ी काली है।

मेरी एक दोस्त बड़ी निराली है।

Pari✍️




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