Pari की कल्पना (परिकल्पना)

यूहीं तो होती नहीं होगी बरसात सावन में,
किसी कहानी में इसका भी कोई किस्सा होगा।
भरी आंखों से नीर बहते होंगे आसमां के शायद,
टूटा जब दिल कोई उसका हिस्सा होगा..


मैं कहूं कि तुम पहली हो, तो ये झूठ हो भी सकता है,
लेकिन तुम्हारे बाद अब कोई और हो नहीं सकता।
तुमसे है मोहब्बत इतनी मेरी जान अगर यकीं मानो तो,
तुम्हारे बाद और कोई मेरी मोहब्बत पा नहीं सकता।


बताओ ताउम्र उसके एक शब्द के लिए तरसता रहा,
कि कहे क्यों फिक्र करते हो तुम पूरी दुनिया की ..
मैं हूं ना तुम्हारे साथ क्यों फ़िक्र तुम्हें किसी और की
जब मेरा साथ और एहसास है तुम्हारे पास...


हर एक बार निराली है, हर मुलाकात निराली है,
जब जब मिला तुमसे, एक एक मुलाकात निराली है।
बातों से तुम सहज भले, लहजा तेरा कुछ और ही है,
चेहरा तेरा फूल सा कोई, निगाहों की झलक कुछ ही है।
Pari✍️ 



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