तुम बस एक एहसास हमारा
सोचा कि लिखें कुछ तेरे बारे में भी आज हम,
फिर कलम तोड़ दी हमने और मुस्कुरा दिए।
तेरे लिए जो एहसास है मेरे दिल में हमेशा से,
वो बस महसूस करना है, इसलिए उसे शब्द नहीं दिए।
वो मुलाकात पहली, वो बात तुमसे पहली,
वो मुस्कुराना तेरा, वो झुकी नजरे तेरी पहली।
वो तेरा शर्माना मुझसे, वो अदाएं तेरी सब निराली,
बड़ी मासूम सी दिखती थी, वो तुम बिलकुल भोली भाली।
याद है मुझे तुम्हारी वो घबराहट, डर डर के बातें करना,
जानती थी तुम सब, फिर भी मुझसे दूर दूर रहना।
मन तुम्हारा भी मिलने को करता था, लेकिन रोज एक नया बहाना,
यूंही तुम रूठ जाती थी तब, और भी जल्दी तेरा मान जाना।
वो फिर मुलाकातें बढ़ी हमारी, वो मिलन की चाहतें हमारी,
तुम थी बंदिशों में तब भी, और पास आने की जिद्द वो हमारी।
बस एक पैगाम तेरा फिर आता, कि क्यों तुम्हें यार समझ नहीं आता,
वो चिट्ठी से समझाना तुम्हारा, और तुम पर मुझे फिर और प्यार आता।
वो आखिरी बात तुमसे, वो आखिरी मुलाकात तुमसे,
वो आखिरी वादा तुमसे, वो फिर न मिलने की बात तुमसे।
वो भीगी आंखे तुम्हारी, वो भारी कदमों से बिछड़ना तुमसे।
वो आखिरी चुम्बन तेरे गालों का, वो आखिरी गले लगना तुमसे।
सच कहुं प्रिये अगर तुम मानो, वो एहसास कभी जाता नहीं,
जो था तुमसे मुझे प्रेम, फिर कभी किसी पर आया नहीं।
तुम सांसों में, तुम एहसासो में, बस अब ये कहना ठीक नहीं,
भूल जाएंगे एक दूजे को कह दिया, ऐसा कर पाना था मुमकिन नहीं।
बस इसी एहसास के साथ कलम तोड़ दी है,
तुम रहोगे जहन में ये बात हमने मान ली है।
जानते हैं अब फिर कभी तुमसे मिल नहीं पायेंगे,
लेकिन मिलने की चाह में ये बेपरवाह जीवन हम बिताएंगे।
Pari✍️
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