हमरू अधिकार, चकबंदी अबकी बार

नव युग का निर्माण करो और मिलकर फिर हामी भरो,
आओ सारे मिलकर आज, चकबंदी का आवाहन करो।
खुलकर आओ घर से निकल बहार, और नारा एक ज़ोर से दो,
खेतों में अब ना हो दूरी, माँग हमारी चकबंदी है जरूरी।

धुँए का जीवन है जीने को, क्यो तुम आज मजबूर हुये,
कौन है जिसने जीवन मे हमारे, संग हवा जहर है भरे।
क्योँ हर बच्चा हमारा आज, निकलता है मास्क के साथ बाहर,
करो खुद से एक प्रश्न दिदो, कौन है इसके लिए ज़िम्मेदार।।

शिक्षा रोजगार का करके बहाना, छोड़ चले हम अपना घर ठिकाना,
जीवन स्तर और अधिक गिर रहा, उडयारो में हो रहा है रहना।
खेल हो या शिक्षा विशेष, अव्वल अभी भी ग्रामीण आ रहे,
फिर किस जिद्द की खातिर, स्वर्ग छोड़ हम शहर जा रहे।।

मेरी सब से एक है गुजारिश, खुद से पहले अपने भविष्य का सोचना,
राह कठिन है नामुमकिन नहीं, भविष्य सुरक्षित है गाँव मे देखना।
आज मास्क का युग चल रहा, कल ऑक्सिजन सिलिंडर का युग होगा।
अब खुद से करो तुम सवाल, क्या ऐसे तुम्हारा भविष्य सुरक्षित होगा,

आज कर लो सब प्रण नया, स्वरोजगार की राह अपनायेगें,
छोड़ शहर की झूठी शान, अपने गाँव सब लौट जाएंगे,
मिलजुल कर रहेंगे सब साथ साथ, और फिर से खेत लहलहायेगें।
चकबन्दी की राह पर चल हम, खुशहाल राज्य और देश बनाएंगे।।
Pari

© ® Pari....

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