कन्या जन्म है वरदान

खुद की खुशियों को छोड़ दिया, किसी और को खुशियां देने को,
सर्वस्या अपना त्याग देती हैं बेटियां, दो घरों को जोड़ने को।
बहुत कुछ सहना है मुझे, बिना कोई दिल में मलाल किये,
बहुत कुछ खो देती है वो, बस दिल में यही ख्याल लिये।।

अधूरा सा होता है बिन बेटी के, जहां में हर परिवार,
फिर आती है घर मे बेटी, संग लेकर खुशियां बेशुमार।
मन प्रफुल्लित हो उठता है सुनकर जिसकी चीख पुकार,
वह होती है बेटी जिसपर, पापा को आता है बहुत प्यार।।

मेरा घर है मेरा परिवार रहता है मन में उसके एक ख्याल,
संजोती है एक एक तिनका, देती है फिर वो सारा घर संवार।
ना कोई शिकायत न कोई मलाल, अपने से छोटों का रखे ख्याल,
बेटी नहीं जिस घर में, क्या कभी पूरा हो सकता है वो संसार।।

सालों साल बिताए घर में और दिया सभी को अतुलनीय प्यार,
फिर एक पल में ही कहीं रिश्ता जोड़, कर देते है उससे किनार।
पल पल अपना लगा दिया था, और दिया था एक घर जो संवार,
देखो फिर बाँटने खुशियाँ, एक दिन छोड़ने को है वो उसे तैयार।।

माना जग में त्याग बड़े है, किये लोगो ने आनेकों उपकार,
बना अशियाना खुद का जो, हो जाये फिर त्यागने उसे तैयार।
सबसे से सुन्दर सबसे मनोरम, कृति है कन्या ईश्वर की,
मिले सम्मान सदा तुम्हें, चाहे जिस रूप में हो तुम्हारी पहचान।

वैसे तो लिखने को जग में, मिल जाएंगे अनेको विषय,
लेकिन कम है जो भी लिखूं, तुम्हारे लिए मैं हर समय।
प्रेम, त्याग और संयम संग, अनेक गुणों का है मिश्रण,
कन्या जन्म ले घर मे जब, समझो मिल गया है वरदान।।
Pari

© ® Pari....

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