तू ही मेरी ज़िंदगी

तुझसे नाराज भी हूँ और तुझपे गुस्सा भी हूँ,
और मुझे यकीन है तेरा भी हाल कुछ ऐसा ही है।
और हो भी क्यों नही, ये तो होना भी चाहिये,
मोहब्ब्त जो बेइंतहा है इक दुजे से हमें शोना।।

वक्त बेवक्त याद आती है तेरी, तू भी कुछ कम याद नही करती होगी,
कैसे पता ये तेरा सवाल होगा, जवाब मेरी हिचकियों में होता है।
न जाने कोई कैसे रहता है बनाकर दूरियाँ, अभी तक सवाल बाकी है,
मै किसी कारागार में हूँ सजावार, तुझसे दूर रहने से बड़ी सजा क्या होगी।।

दिल की बातों को दिल तक समेटे हूँ, शायद अभी नही आती कोई नुमाईश मुझको,
कुछ पल मेरे लिए भी निकाल यारा, मेरी बेचैनी की क्या नही खबर तुझको।
यूहीं न बिखर जाऊँ कहीं मैं, खुद को संजोये हुए हूँ बस तेरे लिये,
मेरे जीवन की एक चाह है, जियूँ तमाम जिंदगी तुझे बाहों में लिये।
pari
© ® Pari....

Love is life......Love is god....Love is everything

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