बस ख्यालो से

ये जो मुड़ मुड़ कर देखते हो हर रोज हमे तुम,
ये सजा है कोई मेरे लिए या फिर तेरी रजा समझूँ..
Pari

पल पल मौसम करवट बदलता जा रहा है,
जैसे कोई चुपके से जीवन मे आ रहा है।
Pari

आज लिखना कुछ और चाहता था, कलम मेरी कुछ और लिखवा गयी,
सोचा था शब्दो से देंगे सजा तुझे, ये फिर तेरी तारीफ लिखवा गयी..
Pari

यकीन था मुझे कि लौटकर आओगे तुम फिर वहीं,
रात भले कितनी भी लम्बी हो सवेरा तो होना ही था....
Pari

न जाने कितने रास्तो में ढूंढ आया तुझे,
शायद तेरा दीदार मुमकिन नही इस जनम में..
Pari

क्यों मुझे मजबूर करते हो तुम अक्सर जनाब,
मैं भी इंसान हूँ यूँ नैनो न पिलाया करो शराब..
Pari

अक्सर राहें बयाँ करती हैं कहानी तेरे होने की,
फिर भी नहीं ढूंढ पाता कोई निशाँ तेरा।
Pari

रही सही कसर भी आज पूरी कर ही दी तुमने,
देखकर भी मुझे आते राह बदल दी तुमने।
Pari

पल दो पल के उबाल को दिल से लगा बैठे हो,
थोड़ी आँच कम करलो जनाब, दाल फिर से गल जायेगी
pari

© ® Pari....

Love is life......Love is god....Love is everything

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