एक सवाल बिना जवाब

न जाने कितने ही मुश्किलें आयी, और थोड़ा सब्र के साथ झेल गया मैं,
न कोई गम किया मैंने कभी, और न कभी कोई शिकायत किसी से।
जैसा भी वक्त आया जीवन में, बस किस्मत की लेख समझ चुप रह गया,
तमाम उम्र बस जो जी है मैंने, खुद को कम और रिस्तो को तवज्जो दी।।

खुद के जीवन मे आये अनेक उतार चढ़ाव,
सब को संभाला बिना किसी रुकाव के।
शायद खुद पर था भरोसा या फिर अपनो का भरोसा,
लेकिन क्या कोई ववत वक्त ऐसा आया जो मैं घबराया??????

आज न जाने क्यों पलक झपक नही रहे, आंखों में नींद नही है आज,
शायद कोई कश्मकश है, या फिर आज पहली बार कुछ बिचलित हूँ मैं।
लेकिन क्यों क्या है वो बात, क्या है कोई इतना बड़ा सवाल आज आया,
न आज मैं सवाल जानना चाहता और न आज सवाल मिल रहा।।

सच है आज एक सवाल बहुत ही परेशान करता रहा है मुझे,
और लाख कोशिशों के बाद भी कोई जवाब नही ढूढ़ पा रहा।
बहुत ही नाजुक है ये वक्त बहुत ही नाजुक घड़ी होगी फैसले की,
काश कोई करिश्मा हो जाये, काश इस सवाल का जवाब मिल जाये...
pari

© ® Pari....

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