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Showing posts from September, 2026

लाडली सरकार

मै अक्सर रात को लिखता हूं, शायद रात ही मेरी दोस्त है, मेरी तनहाई मदद करती है, कि मैं खुद से मिल सकूं कुछ पल। शांत वातावरण और मै, मन भी शांत और तन भी शान्त, फिर उठता है गुबार कोई, फिर तमाम हमाम अशांत।। कोई आता है फिर ख्वाबों में, तनहाई हर ले जाता है, मुझसे मेरी बाते करता है और खुद एक राज बना रहता है। धीरे धीरे नींद खुलती है, और सपना ओझल हो जाता है, सारी ख्वाइश खो जाती है, फिर से एक भोर हो जाती है।। कल रात को मैने सोचा उसे या फिर वो खुद आई थी, मुझसे मिलने की बात थी कोई, या याद दिलाने आई थी। पल पल मेरा चैन चुराया और फिर दूर कही वो खो जाती है, रोज रातों को सपने में आकर, सुबह कहीं ओझल हो जाती है।। मेरा उससे प्रेम अटल था, या वो मेरी बस एक ख्वाइश थी, सूने मेरे जीवन में बस, वही सावन सी एक बारिश थी। धीरे धीरे वह सपना भी टूटा, वर्षों का अपना साथ भी छूटा, बुलंद सितारे लिए फिरता था, एक दिन वो मेरा गुरूर भी टूटा।। अब कोई बाकी ख्वाइश नही है, उसे पाने की गुंजाइश नहीं है, तनहा जीवन अच्छा लगता है, बिन उसके सब सच्चा लगता है। जीवन का अब एक ही सार है, प्रेम करना करवाना बेकार है, दुनिया से मन ऊब चुका, अपनी...

बस यूहीं ख्याल से

वक्त गुजर जाता है मुट्ठी से रेत की तरह, खास भी दूर हो जाते है अजनबी की तरह। फिर भी कुछ यादें जहन में रह जाती हैं, और फिर तनहाई में रह रहकर सताती है।। Pari ✍️ बरसात का मौसम, हरियाली चारों ओर.. भीग गए अगर बारिश में फिर मन भावविभोर। दूर खड़े क्यों देख रह बारिश की इन बूंदों को, पास आओ गले लगालो मौसम की इस साजिश को..।। फिर ये मौसम न आयेगा, आयेगा तो हम न होंगे, न फिर ये उल्लास होगा, दिन ये फिर बीत चुके होंगे। फिर सोचोगे बैठे अकेले, वो भी क्या दिन थे अपने, आंखों में थी आस बड़ी, अपने थे वो सब सपने।। Pari ✍️