मेरा जन्मस्थल, देवभूमि उत्तराखंड
सर्द हवाओं का होता है सिलसिला, मौसम एक सा रहता है हर जगह,
देवताओं का निवास है जहाँ, देवभूमि नाम से प्रसिद्ध है वह जगह।
प्रकृति का अनूठा है संगम, होते हैं यहाँ अक्सर चमत्कार,
चेहरों में मासूमियत है होती, रहता है दिलों में सबके प्यार।
दुनिया मे सब करते है भरोसा, और रखते है सुलझा व्यवहार,
ऐसी है पहचान मेरी और ऐसी है मेरी जन्मभूमि मेरे यार।
ऐसी है पहचान मेरी और ऐसी है मेरी जन्मभूमि मेरे यार।
जीवनदायनी गंगा का उदगम, है बद्रीविशाल का यहां निवास,
पार्वती संग भोलेबाबा नाम केदारनाथ करते है जहां वास,
पार्वती संग भोलेबाबा नाम केदारनाथ करते है जहां वास,
नरसिंह, घंडियाल, भूम्या और भैरों देते शुभ आशीष,
नमन मेरा सदा देवभूमि तुझे, झुकता है मेरा तुझमें शीश।।
नमन मेरा सदा देवभूमि तुझे, झुकता है मेरा तुझमें शीश।।
क्या गाँव और क्या बाजार, मनते हैं यहां रोज त्योहार,
देवता जहाँ रहते प्रतिपल, कराते रहते एहसास हर बार।
बारह महीनों यहाँ ऋतु बसंत, आ जाता है चेहरे पर मौल्यार,
आओ तुम भी देवभूमी दोस्तो, मिलेगा अतुल्य यहाँ सबको प्यार।
देवता जहाँ रहते प्रतिपल, कराते रहते एहसास हर बार।
बारह महीनों यहाँ ऋतु बसंत, आ जाता है चेहरे पर मौल्यार,
आओ तुम भी देवभूमी दोस्तो, मिलेगा अतुल्य यहाँ सबको प्यार।
©®प्रदीप पोखरियाल (pari)
Love is life......Love is god....Love is everything....
Comments
Post a Comment