प्रेम भाव जीवन सार
समय का खेल सिर्फ समय जान सकता है,
नियम कानून भी वह खुद ही तय करता है।
कब, कहाँ, क्यूँ, कैसे और क्या क्या होगा,
इसका निर्णय भी सिर्फ समय ही करता है।।
कब, कहाँ, क्यूँ, कैसे और क्या क्या होगा,
इसका निर्णय भी सिर्फ समय ही करता है।।
खुद को अजय जानने वाले, कब्रों में दफन हो गये,
दुनिया पर हुकुमत करने वाले, शमशानों की राख हो गये।
इतना सब कुछ देख भाल कर, अब भी मानव अबोध बना है,
इससे ज्यादा हँसी ठिठोली, समय की और क्या हो सकती है।।
दुनिया पर हुकुमत करने वाले, शमशानों की राख हो गये।
इतना सब कुछ देख भाल कर, अब भी मानव अबोध बना है,
इससे ज्यादा हँसी ठिठोली, समय की और क्या हो सकती है।।
घर त्याग दिया, रिश्ते तोड़े, बिन्डया खाने को फिर घर छोड़े,
देश-परदेश को चले गये, विलासिता में अनेकों दिल तोड़े।
समय का फिर फेर हुआ, खालीपन का फिर तुम शिकार हुये,
न फिर दौलत रास आयी, विलासिता भी आज डराने लगी।।
देश-परदेश को चले गये, विलासिता में अनेकों दिल तोड़े।
समय का फिर फेर हुआ, खालीपन का फिर तुम शिकार हुये,
न फिर दौलत रास आयी, विलासिता भी आज डराने लगी।।
हे मानव तू अब भी समझ, तू चाबी का बस खिलौना मात्र है,
कितना भी ऊंचा उड़ ले, अंत में तो बस जमीं पर तेरा वजूद है।
परी की बात बस इतनी सी है, समझ सके तो समझ लो यारो,
प्रेम भाव ही जीवन का सार है, इससे ही ये जग संसार है।।
©®Pari
कितना भी ऊंचा उड़ ले, अंत में तो बस जमीं पर तेरा वजूद है।
परी की बात बस इतनी सी है, समझ सके तो समझ लो यारो,
प्रेम भाव ही जीवन का सार है, इससे ही ये जग संसार है।।
©®Pari
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