कुछ कल्पनायें

यूँ शरमा के तेरा झुकी नजरों से देखना मुझको,
याद है आज भी वो अठखेलियाँ तेरी मुझको..!!

मौसम ने करवट ली और मैने बालकॉनी में कुर्सी लगायी,
शायद तुम्हें भी एहसास हुआ और तुम बाल सुखाने चली आयी...!!

न जाने क्यों जिद थी बस तेरी मोहब्बत में जीने की,
मालूम था मुझे जबकि पूरी नहीं होगी ख्वाइश ये भी.!!

शायद ये सिलसिला खत्म नही होगा कभी मोहब्बत में भी,
कि मोहब्बत होगी दोतरफा लेकिन इजहार नही होगा कहीं भी!!

हरपल तुझे याद करता हूँ, हर वक़्त तेरे संग रहना चाहता हूँ,
कभी कोई ऐसा लम्हा न आये मेरी जान, तू खफा हो और मैं मना न पाऊं!!

ऐसा भी क्या गुरूर जनाब जो जमीं पर पैर न हों,
वक्त बदल देता है सबके वक्त को वक्त के साथ।

इश्क़ बेपनाह है लेकिन बेपरवाह तो नहीं,
हर पल तुम्हे याद करना तेरा ख्याल करने से कम तो नहीं..?

सब कहते हैं एक कदम तुम आगे आओ दो कदम हम आयेंगे,
क्यों न एक कदम हम आगे आयें और उन्हें दो कदम बढ़ने का मौका दें.?

राह में चलते चलते न जाने क्यों खो से गये हैं,
शायद वाकिया याद आया होगा जो किस्सा बना था कभी..

कुछ दिनों के लिये हुआ जो तुमसे दूर,
लगा जैसे किस्सा न बन जाऊं कहीं..
Pari

© ® Pari....


 Love is life......Love is god....Love is everything

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