गढ़वाली हास्य "खिखचाट"

              गढ़वाली हास्य, बोला त खिखचाट बल

बल कुछ काम नि तुमरु, जरा कुछ त कैर दिया करो...


मिन बोली- बोल भग्यानी क्या कन, त्वेकु त मि मटल्यूँ भोरी पाणी भी लयोलु..

बल त मि जब भी हाथ धूणु, त मेरा हाथ भिजी जांदीन...क्या करूँ..

मिन बोली- इतरी सी बात, तू यन कैरी कि भोल बटी हथ धूण दा नखला नि खोली...
Pari

बल कख जाण मिन तुम दगड़ बटी, जरा मेरु ख्याल नि तुमथे.....

मिन बोली- अब क्या ह्वाई मेरी नौणी की गुंदकी...


बल छी यु पाणी भी, जब भी हाथ    मा पोडदा...सर्या हाथ भिजा दीन्द..
Pari

बल तुमसे क्वी काम ढंग से नि ह्वे सकदू, कख जौं तुम दगढ़ बटी...

मिन बोली: कनु अब क्या ह्वेई..

बल यू कुक्कर कबरी बटी मि देखी सीटी मनु, अर तुम चुप देखणा राओ बस.
Pari


तुमरा बिगर राती बल नींद नि औंदी, तुमरा सुपन्या देखुणु रैन्दु.....

मिन बोली: एक ता सुपन्या सियां मा औंदीन त झूठ न बोल...अर मेरा बाल सफेद हूणा बल, जरा सीं मेंदी घोल....
Pari

बल तुमसे भौत प्यार करदु, तुमथै पौण खातिर सौंण सुम्बारा ब्रत भी रखदु...

मिन बोली: अब मि क्या कैर सकदू यू भी बतै जादी भग्यानी,  झुल्ला भिजयां मेरा ऊँ ध्वे जा भग्यानी.....
Pari

© ® Pari....


Love is life......Love is god....Love is everything...


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