परिकल्पना✍️✍️
न जाने कैसी ये दिल की लगी है तुझसे,
अभी मुलाकात हुयी और अभी तुम याद आने लगे।
पल भर को तुम ओझल हुये नजरों से,
जैसे आंखें दीदार को तरसने सी लगी।
वो मुलाकात अधूरी ही लगती है आज भी,
जब तुम अधरों पर बात दबा के बैठे थे।
आँखों ने तो कहा था फिर भी बहुत कुछ।
होठों तो तुमने सिले रहने दिया था तब।
मौसम का मिजाज बदला है जो
वो भी कुछ बदले से नजर आ रहे।
दिल मे है उन्हें देखने की चाहत,
वो चांद की तरह छिपे जा रहे
pari
सिर्फ विवाह बंधन में बंधने से साथ रह जाना संभव नहीं होता,
प्रेम की अमृतवर्षा है जो दो व्यक्तियों को जीवनपर्यन्त साथ जोड़े रखती है!
Pari
हर सोची हुयी बात सच नहीं होती,
ख्यालों ख्यालों में मुलाकात नहीं होती।
भले हर वक़्त एक चेहरा पास रहता हो तुम्हारे,
बिन कहे दिल की बात मोहब्बत मुकम्मल नहीं होती...!
Pari✍️
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