मुझे भुला पाओगे क्या...?
मैं लिख भी दूँ अगर कहीं, कि दर्द होता है क्या,
तुम उसे पढ़ने भर की हिम्मत जुटा पाओगे क्या..?
महफ़िलें सजा भी दूँ कहीं मैं अगर,
बैठने की उसमे हिम्मत तुम जुटा पाओगे क्या।
तुम तो हो गैर हमेशा से ही मालूम है मुझे..
अपनेपन का एहसास दिला पाओगे क्या..??
छोड़कर जाओगे साथ मेरा तुम यकीनन
फिर भी कुछ पल मेरे संग बिता पाओगे क्या..?
मिलती है राहत बिता के फुरसत के पल तेरे संग,
थोड़ी सी फुरसत आज भी निकाल पाओगे क्या..?
मैं कर रहा महसूस तेरी कमी को आज बेइंतहा,
इस कमी को तुम कभी मिटा पाओगे क्या...?
तेरी यादों का सिलसिला है मेरे सीने में,
भुला दूँ तुम्हें, कोई ऐसी दवा पिला जाओगे क्या...?
मेरी कलम न लिखे तेरे बारे में कुछ भी,
कोई ऐसा एहसान तुम कर जाओगे क्या..??
©®Pari✍️
Beautiful lines ❤️❤️
ReplyDeleteThanks for reading, liking and comment...
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