मानव गति, मारी गयी है इसकी मति
मन व्यथित है मेरा हे ईश्वर
देखकर मानव की गति सारी.
श्रद्धा अब बची नहीं है कहीं पर भी
ब्लॉग हो गए है भक्ति पर अब भारी..
जगह जगह हो रहे कीर्तन
गली गली में रामलीला मंचन।
भीड़ जुटी है हर जगह भारी,
लेकिन हो रहा सिर्फ ब्लॉग का समर्थन।
शादी हो या फिर पूजा अनुष्ठान कोई,
लुफ्त नहीं उठा पा रहा अब कोई भाई।
कौन आया कौन गया नहीं है इससे मतलब,
बस ब्लॉग बन जाये बढ़िया इसकी है तैयारी।
आजादी के नामपर फूहड़ता है फैल रही,
प्रसिद्धि के चक्कर में नग्नता पसोरी जा रही।
क्या स्त्री क्या पुरुष पैसे के पीछे भाग रहा,
कुछ पैसों के लिये सोशल मीडिया पर कपड़े उतार रहा..
हे मानव तू खुद के जीवन लक्ष्य को पहचान,
सब छोड़ जहां में एक दिन चली जायेगी तेरी जान।
जब एक दिन सम्मुख ईश्वर के तू जाएगा,
3D में अपनी करतूत देख लज्जायेगा।
तब न होगा कोई रिवाइंड करने का ऑप्शन तेरे पास।
अनमोल जीवन हो चुका होगा तब तक ह्रास।
Pari नहीं कहता ये बीमारी है सब पर फैली,
लेकिन अधिकतर आबादी है इससे मैली।
Pari
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