ख्याल ख्याल 3

कुछ लब्ज जो लिख दिये तारीफ में उसकी हमने,
सुना है आजकल पांव जमीं पर नहीं रहते उनके।

मैंने तो पहले ही कहा था हमसे जरा दूर रहना,
हम मौसम कि तरह आने जाने वालो में नहीं।

अब अगर दिल में बस ही गए हैं तो लब्जो में भी ले आओ,
कब तक बस इशारों इशारों में हाल ए दिल बयां होगा।।

बहुत कोशिशों के बाद भी लब्ज़ बस सहमे ही रहे होठों में उनके,
तमाम उम्र इंतजार की सजा मिले क्या कम है बताओ तुम।।

मैंने तो खुद को समझा लिया था तेरे जाने के बाद ही फिर से,
क्यूं आए फिर से लौटकर तुम अगर तनहा ही रहना था हमको।।

मैंने की है मोहब्बत और इसका एहसास भी मुझे रहेगा हमेशा ही,
सिर्फ मतलब के लिए साथ हो जाने वाले अक्सर तनहा ही मिलेंगे।।

रातों में नींद आंखो के और दिन का सुकुन संग नहीं होता माना,
तेरे लिए तेरे बगैर मुस्कुराना काफी है फिर भी मोहब्बत में।।

रात कट ही जाती है तनहा और फिर बेला आती है तुझसे मिलन की,
यही वो एहसास है यकीनमानो जिसके भरोसे तमाम उम्र कट जाती है।।

एक मैं जो बस मोहब्बत के लिए तड़पता रहूं मोहब्बत करने के बाद भी,
एक तुम पा लो सब कुछ जहां में बिना कुछ जतन किए यूहीं।।
Pari

© ® Pari....

Love is life......Love is god....Love is everything

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